Javed Akhtar ghazal in Hindi ,20 ghazal of Javed Akhtar
समय Dosto apko aj ek ese शख्स की गजल को आपके सामने लेके आया हूं । Javed Akhtar इनको कोन नहीं जानता आज के समय में। So let's start
ज़िन्दगी को जावेद अख्तर ने करीब से देखा है। उनके गीत और गजलें शायद यहीं कर रही है। शायराना अंदाज उनको पिता जां निसार अख्तर से मिला। साहिर लुधियानवी का साथ और गुलजार की दोस्ती ने javed Akhtar को तराशा। मोहब्बत को आशिकाना अंदाज में पेश करने में जावेद अख्तर हमेशा आगे रहे। जावेद अख्तर अपनी गजलों में इश्क करने के बाद किसी तरह के पश्चाताप का जिक्र नहीं करते हैं। यह उन्हें जिंदादिल शायर का दर्जा देता है।
Javed Akhtar ghazal in hindi । 20 ghazal of Javed Akhtar
Javed Akhtar ghazal in hindi आँखों में मंज़र कोई
आँखों में मंज़र कोई बसाया जाए,
नफ़रत का काला धुआं हटाया जाए।
आलम कोई भी हो बदल जायेगा,
जाम लबों से कोई लगाया जाए।
कोई तो अपना भीड़ में आयेगा नज़र,
झुकी पलकों का फिर उठाया जाए।
शायद वो आये किसी रोज सजदा करने,
आँचल इसी उम्मीद से बिछाया जाए।
दिल से दुआ निकल आयेगी दोस्तों,
सिसकते होंठों को गर हंसाया जाए।
फर्ज इन्सान का यही कहता है
डूबते को साहिल से लगाया जाए।
Javed Akhtar ghazal in hindi होंठों पे नाम तेरा
होंठों पे नाम तेरा, आंखों में पैगाम है,
हमसे रूठने वाले तुझको सलाम है।
तेरी उल्फ़त ने बस ग़म ही दिये,
तुझसे दिल लगाने का अच्छा इनाम है।
घर को लूटने वाले मुआफ़ हों गए,
हमपे घर सजाने के बहुत इल्जाम है।
तेरे मैख़ाने में साकी क्यूं आये भला?
अब तो हाथों में हमारे अश्कों के जाम हैं।
दिल के मारो से न पूछिए उनका ठिकाना,
कहीं सुबह उनकी कहीं उनकी शाम है।
अब तो मतलब, फ़रेब, बेईमानी है आस
आदमी के दिल में न अल्लाह, न राम है।
Javed Akhtar ghazal in hindi जिंदगी इंतकाम ले रही कि
जिंदगी इंतकाम ले रही कि इम्तिहान क्या पता,
जान में आफत है कि आफत में जान क्या पता।
इसीलिए खुले छोड़े हैं हमने दिल के दरवाजे,
जाने कब कहां से आये कोई मेहमान क्या पता।
गम के सहरा में कहां तक जाओगे।
राहें-मुश्किल है बड़ी थक जाओगे।
कब तक परदे में छुपा रहा है कोई?
प्यारी नजरों को कभी तो झलक जाओगे।
हम गलत हैं कि सही आजमा तो लेते,
कभी महफिल में अपनी बुला तो लेते।
फिर कहते कि कम्बख्त चीज है बुरी,
पहले जाम होठों से लगा तो लेते।
Javed Akhtar ghazal in hindi ये अश्क हैं किसके ये
ये अश्क हैं किसके ये किसके निशां हैं,
पिघलती मोम है ज़िंदगी किसके बयां हैं।
यहां तो खामोशी के सिवा कुछ भी नहीं,
कौन रहते हैं यहां, ये किसके मकां हैं।
अजब शहर की हालत नज़र है आती,
हर तरफ़ हाथों में मौत के सामां है।
उठ गई हैं दीवारें रिश्तों के दरमियां,
रह गए घरों में रिश्तों के गुमां हैं
ज़रा सोचकर यहां दिल लगाइए साहब,
मुहब्बत हवा का झोंका नहीं तूफ़ां है।
मिलता नहीं प्यार अदब, सलीका कहीं,
दिल सभी के यहां मतलबों के दुकां है।
ऐतबार करना मगर ज़रा संभल के आस
कब वादों से मुकर जाये ये जुबां है।
Javed Akhtar ghazal in hindi तेरे खयालों की रोशनी रही
तेरे खयालों की रोशनी रही पास हमेशा,
ज़िदगी मेरी फिर भी रही उदास हमेशा।
ये अलग बात थी कि तू न सुन पाया,
तुझको आवाज़ देती रही मेरी हर सांस हमेशा।
पतझड़ में भी हंसने की कोशिश कर ले,
मिलता नहीं किसी को भी मधुमास हमेशा।
बेइमानों के ही हक़ में होते रहे फ़ैसले,
वो चलते रहे हैं चाल कुछ खास हमेशा।
न पूछ क्यूं रिश्तों के जाल में उलझकर,
दम तोड़ती रही मेरी हर आस हमेशा।
Javed Akhtar ghazal in hindi जब तेरे ख़त सिरहाने
जब तेरे ख़त सिरहाने रखते हैं,
लगता है जैसे खज़ाने रखते हैं।
तुमको तन्हा चलने की आदत क्यों,
हम तो साथ अपने ज़माने रखते हैं।
उसकी बेरूखी का ग़म नहीं होता,
दिल को बहलाने के बहाने रखते हैं।
हमको नहीं गरज किसी मयख़ाने की,
आंखों में अश्कों के पैमाने रखते हैं।
अब भी उठती है महक तेरी यादों की
सूखे गुलाबों में अफ़साने रखते हैं।
कभी तो मिलेगा आस का मुकाम,
यही सोचकर सीने में उड़ानें रखते हैं।
Javed Akhtar ghazal in hindi चलन जिंदगी का बदला जाए
चलन जिंदगी का बदला जाए तो अच्छा है,
किसी के ग़म में अश्क बहाए तो अच्छा है।
हादसा है क्या और रंजे-हालात है क्या?
किताबें ग़म की पढ़ी जाए तो अच्छा है।
और भी आसान हो जाएगी मंज़िलें,
कांटों को राहों से हटाए तो अच्छा है।
तूफां नफ़रतों का उठने लगे इससे पहले,
नांव प्यार की साहिल से लगाए तो अच्छा है।
उम्र खिलोनों से खेलने की कहां रह गई,
नादानियां बाज़ार में बेच आए तो अच्छा है।
घरौंदे रेत के बनाकर थक चुके हैं आस
अब किसी दिल में घर बनाए तो अच्छा है।
Javed Akhtar ghazal in hindi वक्त की हवाओं का यारों
वक्त की हवाओं का यारों असर देख लो,
बिख़रे हुए पत्तों का ये मंज़र देख लो।
शौक से छुप जाओ बेवफाई के जंगल में,
पहले मेरी आंखों में वफ़ा का खंज़र देख लो।
अश्कों से उभर आये हैं हथेली पर छालें,
है इंतज़ार में तपिश किस कदर देख लो।
पल-पल में हुस्नें रंगत उड़ती नजर आयेगी,
आईने में शक्ल गौर से अगर देख लो।
ठोकरों में आये, तो मंदिरों में सज गए,
रास्तों के पत्थरों के भी मुकद्दर देख लो।
आस यूं तो रहते हैं घरों में रिश्ते लेकिन,
दिलों के दरमियां है कितना अंतर देख लो।
Javed Akhtar ghazal in hindi आंधियों ने जलाये हो चराग ऐसे
आंधियों ने जलाये हो चराग ऐसे मंजर नहीं देखे,
हमने दरिया से मिलते कभी समंदर नहीं देखे।
गैरों तक ही सिमट के रहगई निगाहें उनकी,
भूलकर भी रूख उनके हम पर नहीं देखे।
सौगात जख्मों की हर कोई देके चला है,
मरहम दिल पे लगाये ऐसे चारागर नहीं देखे।
चीज बूरी है बात अक्सर वो ही करते हैं,
जाम लबों से जिसने लगाकर नहीं देखे।
दिल में दर्द और आंखों में आंसू देखे हैं आस
हमने वफादारों के हाथों में पत्थर नहीं देखे।
Javed Akhtar ghazal in hindi कभी दिल में किसी को
कभी दिल में किसी को बसाके देखिए,
रिश्ते भी कुछ नये बनाके देखिए।
रंग एक-सा ही नज़र आयेगा,
लहू को लहू से मिलाके देखिए।
महक उनके बदन से भी आयेगी,
अपने गुलशन में कांटे खिलाके देखिए।
हज़ारों बेगुनाहों की आहें दफन होगी,
सियासत की दीवारें गिराके देखिए।
सभी मतलबों के ही साथी मिलेंगे,
न हो यकीं तो आज़माके देखिए।
साथ तुम्हारे भी चलेगी आस दुनिया,
जुगनूओं-सा ज़रा जगमगाके देखिए
Javed Akhtar ghazal in hindi लाख मशक्कत कर लो
लाख मशक्कत कर लो, कुछ न हासिल होगा,
न अपना समंदर होगा, न कोई साहिल होगा।
अब तो वो ही होगा खड़ा ज़माने के मुकाबिल,
जिसका अपना फ़न होगा, जो किसी काबिल होगा।
वो जो नहीं जानता प्यार-ओ-खुलूस के मायने,
दिल उसका मोम नहीं वह संगदिल होगा।
बंदगी-ईबादत, धर्म-कर्म, पूजा और ईमाँ,
नहीं जिसकी मंज़िल राही वो जाहिल होगा।
वफ़ा के नाम पर जो खेलता हो दिल से,
सच कहते हैं वो मेहबूब नहीं क़ातिल होगा।
चलो एक बार में ही खत्म कर दें ये सफ़र,
क्यों खड़ा मुन्तिजर, क्यूं परिशां किसी का दिल होगा।
आस कभी बे-आस जिंदगी के कई हैं रंग,
कहो? किस-किस का चेहरा नजर में दाखिल होगा।
Javed Akhtar ghazal in hindi जाने क्यों अहले जहां उनको
जाने क्यों अहले जहां उनको भूल गए।
जो दे के हमें अपने उसूल गए।
आज उनके ही चमन वीरान आते नज़र,
खिलाके कलियां, जो हटाकर बबूल गए।
कांटे रह गये हैं हमारी रहगुजर पे,
उनकी राहों की तरफ सारे फूल गये।
पाक दामन हमारा फिर भी दागदार कहलाये,
उनके दामन के हर दाग मगर धूल गए।
कर सके न फिर कोई तमन्ना इसी खातिर,
सीने में आस के वो चुभो के शूल गए।
Javed Akhtar ghazal in hindi कहां तक बता जायेगा मेरे या
कहां तक बता जायेगा मेरे यार,
चल के खूब पछतायेगा मेरे यार।
यह राह वफा की है मुश्किल,
ठोकरों पे ठोकर खायेगा मेरे यार।
कोई हमदर्द, हमराह-हमदम नहीं,
अब-किसको आज़मायेगा मेरे यार।
प्यार के नाम पे है दिल का तमाशा,
टूट के बिख़र जायेगा मेरे यार।
सियासी चालों ने खोखली कर दी जड़ें,
किस दरख़त को संभालेगा मेरे यार।
आस दिल में न पालना कोई,
शर्म से तर हो जायेगा मेरे यार।
Javed Akhtar ghazal in hindi कहो किस पे करे ऐतबार अब
कहो किस पे करे ऐतबार अब,
दोस्त ही करने लगे वार अब।
सब खेल है वक्त का हयात में,
करें किस-किस का इंतज़ार अब।
जब भी रहे तो ख़याल इतना रहे,
दामन वफ़ा का न हो दाग़दार अब।
उसकी जुदाई का असर न पूछो,
साथ रोने लगी है दरों-दीवार अब।
रहना है गर किसी नज़र में आस,
तो आंचल शर्मों-हया का संवार अब।
Javed Akhtar ghazal in hindi प्यार में आजकल यूं भी
प्यार में आजकल यूं भी होने लगा है,
दिल की जगह जिस्म मचलने लगा है।
दोस्ती, प्यार, वफ़ा-औ खुलूस का जज्बा,
किताबों में ही दम तोड़ने लगा है।
अपने हाथों की लकीरों में क्या है भला?
आदमी अपने ही सवालों में उलझने लगा है।
जाने अब के ये कैसा दौर आ गया,
शहर में नफरतों का गुबार छाने लगा है।
उससे निस्बत ही न रहे तो है अच्छा,
रह-रह के रूठना उसका खलने लगा है।
वक्त के मारों को जबसे देखा है यहां,
आस भी अपने अंज़ाम से डरने लगा है।
Javed Akhtar ghazal in hindi तरसती आंखों को इक झलक
तरसती आंखों को इक झलक दिखा तो दीजिए,
दीवाने दिल को संभलना सिखा तो दीजिए।
उस पार आप ठहरे और इस पार हम खड़े,
फासलों की इस दीवार को गिरा तो दीजिए।
प्यासे हैं कितनी मुद्दत से आपकी हसरत में,
इक जाम होठों का हमें भी पिला तो दीजिए।
नश्तर-सी चुभने लगी है ये खामोशी आपकी,
मुस्कुराइए ज़रा लबों को हिला तो दीजिए।
मुरझा गया है चमन हमारी हसरतों का
बहार बनके आइये कोई गुल खिला तो दीजिए।
उल्फ़त न सही नफ़रत ही सही कबूल है मगर,
आस की चाहत का कोई सिला तो दीजिए।
Javed Akhtar ghazal in hindiखुशियां कम और अरमान बहुत हैं,
खुशियां कम और अरमान बहुत हैं,
जिसे भी देखिए यहां हैरान बहुत है।
करीब से देखा तो है रेत के घर,
दूर से मगर उनकी शान बहुत है।
कहते हैं सच का कोई सानी नहीं,
आज तो झूठ की आन-बान बहुत है।
मुश्किल से मिलता है शहर में आदमी,
यूं तो कहने को इन्सान बहुत हैं।
तुम शौक से चलो राहें-वफा लेकिन,
ज़रा संभल के चलना तूफान बहुत है।
वक्त पे न पहचाने कोई ये अलग बात,
आस, वैसे तो अपनी पहचान बहुत है।
Javed Akhtar ghazal in hindi आज फिर ख्वाहिशों को दिल
आज फिर ख्वाहिशों को दिल में जगा दीजिए,
तोड़ दो बंदिशे चिंगारियों को हवा दीजिए।
भला कब रूके हैं यहां प्यार के बादल?
किसने रोका है ज़रा हमें भी बता दीजिए।
दिल के ज़ख्म कहीं नासूर न बन जाएं,
बन के चारागर कभी तो दवा दीजिए।
फिर सुलग उठे यहां हौंसलों के शोलें,
बुझी-बुझी-सी आग को हवा दीजिए।
नफ़रतों का तूफ़ा उठाए जहां इससे पहले,
कश्तियां चाहत की साहिल से लगा दीजिए।
रह-रहके जो याद उनकी दिलाये आस
ऐसी उनकी हर निशानी को हटा दीजिए।
Javed Akhtar ghazal in hindi दरिया-ए-इश्क में जो उतर जायेगा
दरिया-ए-इश्क में जो उतर जायेगा,
फिर होश कहां उसे वो किधर जायेगा।
राह उल्फ़त की अगर चले दुनिया,
अदा बदलेगी हर चेहरा संवर जायेगा।
हमसफर हो साथ तो क्या है मुश्किल,
राह कोई भी हो आसां हर सफ़र जायेगा।
पत्थरों से न उलझ दिल भी ज़रा देख,
आईना ही तो है टुट के बिख़र जायेगा।
जब गुजर गया लम्हा आंखें पथरा गईं,
कब सोचा था मुझसे हादसा डर जायेगा।
हर तरफ धुआं-सा कोहरा-सा, अंधेरा-सा,
कौन पहचानेगा शहर में अगर जायेगा।
तुम ज़माने के साथ चलो शौक से,
आस, तन्हा है चाहे वो उधर जायेगा।
Javed Akhtar ghazal in hindi दिल में धड़कनें न रहे दुआ
दिल में धड़कनें न रहे दुआ मांगते हैं,
हम अपने गुनाहों की सज़ा मांगते हैं।
फिर सुलग उठे यहां हौसलों के शोलें,
बुझी-बुझी सी आग को हवा मांगते हैं।
बेहया हो चली है फितरतें सभी की,
आदमी में ज़रा-सी हया मांगते हैं।
दिल की बेचैन सासों को आये करार,
प्यार में डूबी कोई सदा मांगते हैं।
हम खुद ही ढूंढ़ लेते हैं अपना ठिकाना,
कब गैर से मंज़िल का पता मांगते हैं।
आस के पांव में न हो जंज़ीर कोई,
और कुछ न इसके सिवा मांगते हैं।
